आत्मा और परमात्मा
आत्मा का प्रकाश सदैव अपरिवर्तित, स्पंदन युक्त और शुद्ध रहता है।
हमारी आत्मा का प्रकाश कितने विस्तार तक बाहर फैल सकता है। हमारी चेतना के गुण पर निर्भर करता है। हमारे विचार, भावनाएं, गुण और अज्ञान हमारी चमक को अंधकारमय कर देते हैं।
आत्मा का निरूपण श्री भागवत गीता में भी किया गया है। आत्मा शस्त्र, अग्नि, जल, वायु के प्रभाव से परे हैं, कोई उसे असर नहीं होता।
इस संसार में अनगिनत ज्ञानी पुरुष हुए हैं जिन्होंने अपनी आत्मा पाई और आत्मा को पाने का रस्ता भी बतलाया। कृष्ण, बुद्ध, जीजस, अष्टावृक, राजा जनक, संत कबीर, मीरा बाई, गुरू नानक, साईं बाबा और मां निर्मला आदि।
आत्मा एक ऊर्जा का रुप है, जिसके आत्मज्ञान को कुंडलनी जागृति भी कहते हैं। ये सही गुरू के सानिध्य में ही उनके आशीर्वाद से संभव है।
कई धार्मिक, दार्शनिक और पौराणिक परंपराओं में आत्मा एक जीवित प्राणी का
निराकार सार है। खुद को यह समझाना कि मैं शरीर नही आत्मा हूं। यह आत्मज्ञान के मार्ग पर रक्खा गया पहला कदम है। केवल मानव आत्माएं अमर हैं, जबकि शरीर इस जीवन के कर्म का अनुभव करने के लिए केवल एक तंत्र है।🙏
आत्मा और परमात्मा में क्या अन्तर है?
आत्मा अनादी अविनाशी है, इस शरीर को चलाने वाली उसकी मालिक।
मैं, क्या है, हूं?
मैं सिर्फ एक आत्मा हूं
शरीर से आत्मा निकल गई तो बस मृत शरीर रहता है।
आत्मा परमात्मा का ही सूक्ष्म स्वरूप (अंश) है। वह अजर अमर है।
परमात्मा सर्वयाप्त आलौकिक शक्ति है, जिसका सीधा संबंध सम्पूर्ण ब्रह्मांड से होता है।
आत्मा तो हमारे हृदय में ही है, वहीं परमात्मा का वास होता है
हृदय ही परमात्मा का घर (मन्दिर है।
आजकल की भाग दौड़ भरी दुनिया में आदमी तनाव में है। यदि वाकई उसे आत्मा का ज्ञान और आनन्द लेना है या समझना है तो बस (ध्यान योग) ही एक ऐसी पद्धति है, जिसके द्वारा वह आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर इस विधि को जान सकता है और अपने को पहचान सकता है आनंद ले सकता है।
जब उसका खुद से शुद्धिकरण होगा आत्म साक्षात्कार होगा तभी वह आत्मा और परमात्मा का अंतर उसे समझ आएगा।
सहज समाधि लगेगी आत्म अनुभूति उसकी अपनी होगी जो शब्दों में व्याख्या उसकी नहीं कर सकते। वह अनुभूति नि शब्द होती है जिसमें सिर्फ आनंद ही आनंद होता है वही आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है।
सब मनुष्यों की यह अनुभूति अलग-अलग होती है।
किसी सही गुरु के सामने में आत्म साक्षात का प्राप्त करना चाहिए। गुरु वही जो साहिब से मिलवाए।
जब सही मायनों में हम अपनें को जान लेते हैं तभी परमात्मा को भी।
आत्मा का ज्ञान बहुत सूक्ष्म है। हमारे शरीर में बहुत नाड़ियां हैं, जिन में तीन प्रमुख नाड़ियां होती हैं। वह हमारे भूतकाल भविष्य काल वर्तमान की स्थिति को भी दर्शाती हैं उसी से हमारे सुख-दुख बने हुए हैं। हमारा शरीर पूरा एक साइंस है। योग के माध्यम से इन नाड़ियों की सफाई करी जाए ध्यान द्वारा। जैसे-जैसे ये ज्ञान के द्वारा यह नाड़ियां साफ होती जाती है वैसे ही हमारे अंदर आत्मा का प्रकाश जागृत होता है तभी हमारा परमात्मा से मिलन होता है।
मनुष्य का स्वभाव भी बदल जाता है वह अपना सुख न देखकर सबके सुख की बात सोचता है, चित शांत हो जाता है करुणा में दिल हो जाता है, सबके लिए उसके हृदय में शुद्ध प्रेम उड़ता है यही आत्मा का आनंद है यही परमात्मा है।
गीता ठाकुर दिल्ली से
प्रतियोगिता हेतु
Mohammed urooj khan
22-Apr-2024 11:51 AM
👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾
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Arti khamborkar
20-Apr-2024 08:54 AM
Awesome
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